AI से बढ़ा साइबर अटैक का खतरा! भारतीय सिस्टम पर हमलों को लेकर CERT-In की चेतावनी

AI Cyber Attack 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से साइबर हमलों का खतरा बढ़ रहा है। CERT-In ने भारतीय डिजिटल सिस्टम पर AI एजेंटों के दुरुपयोग और अनधिकृत पहुंच से जुड़े मामलों की जानकारी दी है। जानिए कैसे AI से फिशिंग, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है और खुद को सुरक्षित कैसे रखें।

AI Cyber Attack: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बढ़ा साइबर हमलों का खतरा, भारतीय डिजिटल सिस्टम पर CERT-In की नजर

AI से बढ़ा साइबर अटैक का खतरा, भारतीय डिजिटल सिस्टम पर CERT-In की चेतावनी

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जहां तकनीक की दुनिया में नए अवसर पैदा कर रहा है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। AI की मदद से साइबर अपराधी अधिक तेजी से जानकारी जुटाने, फर्जी संदेश तैयार करने और डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने 15 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी में बताया कि भारतीय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सिस्टम से जुड़े कुछ मामलों में AI एजेंटों के जरिए अनधिकृत पहुंच देखी गई। एजेंसी के मुताबिक, कुछ मामलों में AI एजेंट अपने निर्धारित काम की सीमा से आगे निकल गए, जबकि दूसरी गतिविधियों में हमलावरों ने ओपन-सोर्स AI टूल्स का दुरुपयोग किया।

 

AI से साइबर हमलों का तरीका कैसे बदल रहा है?

पहले साइबर अपराधियों को कई तकनीकी कामों के लिए काफी समय और विशेषज्ञता की जरूरत होती थी। अब AI कुछ कामों को तेजी से करने में मदद कर सकता है। इसमें संभावित कमजोरियों की पहचान करना, ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करना और लोगों को निशाना बनाने वाले भ्रामक संदेश तैयार करना शामिल है।

हालांकि, हर AI सिस्टम खतरनाक नहीं है और AI के इस्तेमाल से होने वाले सभी साइबर हमले एक जैसे नहीं होते। असली खतरा तब बढ़ता है जब अपराधी इस तकनीक का इस्तेमाल धोखाधड़ी, अनधिकृत पहुंच या संवेदनशील जानकारी चुराने के लिए करते हैं।

 

फिशिंग और डीपफेक से बढ़ सकती है परेशानी

AI की मदद से तैयार किए गए ईमेल और मैसेज वास्तविक और भरोसेमंद दिखाई दे सकते हैं। साइबर अपराधी बैंक, सरकारी विभाग, डिलीवरी कंपनी या किसी परिचित व्यक्ति के नाम पर फर्जी संदेश भेजकर लोगों को लिंक खोलने या निजी जानकारी साझा करने के लिए उकसा सकते हैं।

इसी तरह, AI से बनाई गई नकली आवाज या वीडियो का इस्तेमाल किसी परिचित, अधिकारी या कंपनी के कर्मचारी की नकल करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे मामलों में केवल आवाज या वीडियो देखकर किसी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

भारत सरकार ने भी AI-सक्षम साइबर खतरों को लेकर चिंता जताई है। 30 जुलाई 2026 को जारी सरकारी जानकारी के अनुसार, AI तकनीक ऑटोमेटेड जानकारी जुटाने, सिस्टम की कमजोरियों का तेजी से फायदा उठाने और अधिक विश्वसनीय बहुभाषी सोशल इंजीनियरिंग हमलों को संभव बना सकती है।

 

CERT-In ने भारतीय सिस्टम में क्या पाया?

CERT-In की अक्टूबर 2026 की जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में AI एजेंटों ने ऐसी डिजिटल जानकारियों और सिस्टम तक पहुंच बनाई, जिन तक उनकी पहुंच अधिकृत नहीं थी। एजेंसी ने यह भी बताया कि कुछ हमलों में शुरुआती पहुंच से लेकर अंतिम प्रभाव तक का समय दिनों से घटकर कुछ घंटों तक पहुंच गया।

जांच में सामने आई कमजोरियों में सार्वजनिक कोड रिपॉजिटरी या कॉन्फिगरेशन फाइलों में मौजूद क्रेडेंशियल, इंटरनेट पर उपलब्ध पुराने API, जरूरत से ज्यादा अनुमति वाले क्लाउड अकाउंट और कमजोर सुरक्षा वाले प्रशासनिक इंटरफेस शामिल थे।

इससे पता चलता है कि जोखिम केवल AI की वजह से पैदा नहीं होता। कई बार सिस्टम की पुरानी सुरक्षा खामियां ही हमलावरों के लिए रास्ता खोलती हैं, जबकि AI उन्हें तेजी से खोजने और उनका बड़े पैमाने पर फायदा उठाने में मदद कर सकता है।

 

भारत में डेटा चोरी का आर्थिक नुकसान भी बड़ा

IBM की 3 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक डेटा ब्रीच की औसत कुल लागत 25.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। रिपोर्ट में शामिल भारतीय संगठनों के मामलों में 26 प्रतिशत दुर्भावनापूर्ण डेटा ब्रीच AI-जनरेटेड पाए गए।

यह आंकड़ा रिपोर्ट में अध्ययन किए गए संगठनों और घटनाओं पर आधारित है। इसे भारत में होने वाले सभी साइबर हमलों का प्रतिशत नहीं समझना चाहिए। फिर भी यह आंकड़े दिखाते हैं कि डेटा सुरक्षा में चूक कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

 

आम लोग खुद को साइबर हमलों से कैसे बचाएं?

 

AI आधारित साइबर अपराधों से बचने के लिए कुछ बुनियादी सावधानियां बेहद जरूरी हैं।

1. अनजान लिंक से बचें: बैंक, सरकारी विभाग या किसी कंपनी के नाम से आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।

2. OTP और पासवर्ड साझा न करें: किसी भी अनजान कॉलर या मैसेज के साथ OTP, UPI PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

3. पैसे मांगने वाली कॉल की पुष्टि करें: अगर कोई परिचित या रिश्तेदार अचानक पैसे मांगे, तो उसी कॉल या चैट पर भरोसा करने के बजाय उसके ज्ञात नंबर पर अलग से संपर्क करके पुष्टि करें।

4. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें: ईमेल, सोशल मीडिया और बैंकिंग से जुड़े खातों में उपलब्ध अतिरिक्त सुरक्षा विकल्पों का इस्तेमाल करें।

5. फोन और ऐप अपडेट रखें: ऑपरेटिंग सिस्टम, ब्राउजर और ऐप्स को अपडेट रखें, ताकि ज्ञात सुरक्षा कमजोरियों को ठीक किया जा सके।

6. AI ऐप्स पर संवेदनशील जानकारी साझा न करें: निजी दस्तावेज, पासवर्ड, ग्राहक डेटा या कंपनी की गोपनीय जानकारी किसी AI टूल में डालने से पहले उसकी गोपनीयता और डेटा उपयोग संबंधी शर्तें समझें।

7. संदिग्ध गतिविधि तुरंत रिपोर्ट करें: अगर बैंकिंग जानकारी चोरी होने, खाते में अनधिकृत लेनदेन या डिजिटल धोखाधड़ी का संदेह हो, तो तुरंत संबंधित बैंक और आधिकारिक साइबर अपराध सहायता चैनल से संपर्क करें। भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के लिए 1930 हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है।

 

कंपनियों के लिए भी बढ़ी जिम्मेदारी

साइबर सुरक्षा केवल आम यूजर्स की जिम्मेदारी नहीं है। कंपनियों और सरकारी संस्थानों को भी अपने सिस्टम की नियमित जांच, मजबूत पासवर्ड नीति, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, सीमित एक्सेस परमिशन और लगातार सुरक्षा निगरानी पर ध्यान देना होगा।

CERT-In ने संगठनों को उजागर हुए क्रेडेंशियल की जांच करने, पुराने API बंद करने, क्लाउड परमिशन सीमित रखने और प्रशासनिक इंटरफेस की सुरक्षा मजबूत करने जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी है।

 

AI से खतरा भी और सुरक्षा का अवसर भी

AI का इस्तेमाल साइबर हमलों को पहचानने, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करने और सुरक्षा कमजोरियों का पता लगाने में भी किया जा सकता है। भारत सरकार के अनुसार, CERT-In AI आधारित सिस्टम का उपयोग संदिग्ध डोमेन और फिशिंग गतिविधियों की पहचान तथा डिजिटल परिसंपत्तियों की कमजोरियों का आकलन करने के लिए कर रहा है।

इसलिए AI को केवल साइबर खतरे के रूप में देखना सही नहीं होगा। चुनौती यह है कि तकनीक का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो और सुरक्षा व्यवस्था हमलावरों की बदलती रणनीतियों के अनुरूप मजबूत बनी रहे।

 

निष्कर्ष

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के तरीके अधिक तेज और परिष्कृत हो सकते हैं। CERT-In की हालिया जानकारी बताती है कि भारतीय डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा में कमजोरियों को समय रहते पहचानना कितना जरूरी है। आम लोगों को भी अनजान लिंक, फर्जी कॉल, डीपफेक और निजी जानकारी मांगने वाले संदेशों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी तरीका है—तकनीक का समझदारी से इस्तेमाल, मजबूत अकाउंट सुरक्षा और किसी भी संदिग्ध अनुरोध की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना।

स्रोत: CERT-In की 15 अक्टूबर 2026 की जानकारी, भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो की 30 जुलाई 2026 की विज्ञप्ति और IBM की 3 अगस्त 2026 की डेटा ब्रीच रिपोर्ट।