सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, खरीदारी से पहले जानें 22 और 24 कैरेट गोल्ड का नया भाव

भारत में सोने की कीमतों में अक्टूबर के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतों में गिरावट, अमेरिकी ब्याज दरों की चिंता और निवेशकों की बिकवाली का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। जानिए 22 और 24 कैरेट सोने के ताजा भाव, कीमतों में गिरावट की वजह और खरीदारी से पहले जरूरी बातें।

सोने की कीमतों में गिरावट से बाजार में हलचल, अक्टूबर में कितना सस्ता हुआ गोल्ड?

भारत में सोने की कीमतों में इन दिनों लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अक्टूबर 2026 के आखिरी दिनों में सोने की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। त्योहारों और शादी के सीजन से पहले सोने के भाव में आई इस कमजोरी को लेकर बाजार में चर्चा तेज हो गई है।

30 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। वहीं भारतीय बाजार में भी गोल्ड के भाव पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इस गिरावट की प्रमुख वजह मानी जा रही हैं।

 

अक्टूबर में कितना सस्ता हुआ सोना?

Business Today के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1 अक्टूबर 2026 को लगभग 1,49,730 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 30 अक्टूबर तक यह घटकर लगभग 1,43,940 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।

इस तरह अक्टूबर के दौरान कीमत में करीब 5,790 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। महीने के दौरान सोने ने 1,51,420 रुपये का उच्च स्तर और 1,42,470 रुपये का निचला स्तर भी देखा।

ये आंकड़े बाजार के संकेतक हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलरी दुकानों पर वास्तविक कीमत में अंतर हो सकता है।

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 अक्टूबर को सोने की कीमत में लगभग 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पॉट गोल्ड गिरकर 3,897.09 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। यह अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर था।

जनवरी 2026 में बने रिकॉर्ड स्तर से सोने की कीमत लगभग 30 प्रतिशत नीचे आ चुकी थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई इस गिरावट का असर भारतीय बुलियन बाजार पर भी पड़ा है।

 

सोने की कीमतों में गिरावट की 4 बड़ी वजहें

1. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर चिंता

अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बने रहने की आशंका से सोने पर दबाव बढ़ा है। सोना अपने आप में ब्याज नहीं देता, इसलिए जब निवेशकों को अन्य सुरक्षित ब्याज वाले विकल्प आकर्षक लगते हैं, तो सोने की मांग प्रभावित हो सकती है।

 

2. निवेशकों की बिकवाली

अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के बाद कुछ निवेशकों को अपनी दूसरी पोजीशन बेचकर नकदी जुटानी पड़ी। इससे सोने सहित कई कीमती धातुओं पर भी दबाव आया।

 

3. वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां

अमेरिका की महंगाई, डॉलर की स्थिति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं। निवेशक इन सभी संकेतों पर नजर रख रहे हैं।

 

4. एशियाई बाजार में कमजोर मांग

अंतरराष्ट्रीय बाजार में एशिया की कमजोर मांग भी सोने की कीमतों पर दबाव डालने वाले कारणों में शामिल रही है।

 

22 और 24 कैरेट सोने में क्या अंतर है?

सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता समझना बेहद जरूरी है।

24 कैरेट गोल्ड: इसमें लगभग 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है। इसे आमतौर पर सिक्के और बार के रूप में खरीदा जाता है।

22 कैरेट गोल्ड: इसमें लगभग 91.6 प्रतिशत सोना होता है। मजबूती बढ़ाने के लिए इसमें अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं। इसी वजह से ज्यादातर सोने के आभूषण 22 कैरेट में बनाए जाते हैं।

 

सोना खरीदने से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान

1. BIS हॉलमार्क और HUID नंबर जरूर जांचें।

2. ज्वेलरी की शुद्धता और कैरेट की पुष्टि करें।

3. सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज भी पूछें।

4. बिल में सोने का वजन, शुद्धता और GST की जानकारी जांचें।

5. खरीदारी से पहले एक से अधिक दुकानों के भाव की तुलना करें।

 

क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?

सोने की कीमतों में गिरावट के बाद खरीदारों के लिए बाजार पर नजर रखने का यह महत्वपूर्ण समय है। हालांकि, केवल कीमत कम होने के आधार पर खरीदारी का फैसला करना उचित नहीं है।

यदि कोई व्यक्ति शादी या त्योहार के लिए आभूषण खरीदना चाहता है, तो उसे अपनी जरूरत, बजट और स्थानीय ज्वेलर के भाव की तुलना करनी चाहिए।

वहीं निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जैसे संकेतकों पर भी ध्यान देना चाहिए।

 

आगे सोने की कीमतों का रुख क्या रहेगा?

आने वाले दिनों में सोने की कीमतें कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेंगी। अमेरिका की आर्थिक नीतियां, महंगाई के आंकड़े, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच खरीदारों और निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।

 

निष्कर्ष

अक्टूबर 2026 के दौरान सोने की कीमतों में आई गिरावट ने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल बढ़ा दी है। जहां एक तरफ खरीदारों को कम कीमतों पर सोना खरीदने का अवसर मिल सकता है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।

इसलिए सोना खरीदने से पहले ताजा भाव, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और टैक्स की जानकारी जरूर जांचें।