WhatsApp ग्रुप से शुरू हुआ ठगी का खेल, Telegram पर दिए गए ऑनलाइन टास्क
अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में ऑनलाइन टास्क के जरिए कमाई का लालच देकर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। नरोदा इलाके में रहने वाले 24 वर्षीय BCA छात्र ध्रुव पटेल ने आरोप लगाया है कि Amazon के प्रोडक्ट रेटिंग और ऑनलाइन असाइनमेंट के नाम पर उनसे कुल 9.66 लाख रुपये ठग लिए गए। शिकायत के मुताबिक, शुरुआत में छोटी रकम का भुगतान करके उनका भरोसा जीता गया, लेकिन बाद में पैसे निकालने के लिए अलग-अलग शुल्क के नाम पर लगातार रकम मांगी गई।
इस मामले की जानकारी 26 अक्टूबर 2026 को सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, छात्र ने साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, ऑनलाइन ग्रुप और बैंक खातों की जांच कर रही है।
WhatsApp ग्रुप से हुई शुरुआत
शिकायत के अनुसार, 8 अक्टूबर को ध्रुव पटेल को IYOM नाम के एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में मौजूद लोगों ने उन्हें Amazon के प्रोडक्ट लिंक खोलने और स्क्रीनशॉट भेजने जैसे काम करने के बदले पैसे कमाने का प्रस्ताव दिया।
इसके बाद उन्हें Telegram ग्रुप में शामिल होने के लिए कहा गया, जहां प्रोडक्ट रैंकिंग से जुड़े ऑनलाइन टास्क दिए जाते थे। छात्र के मुताबिक, शुरुआती टास्क पूरा करने पर उन्हें 160 रुपये मिले। इस भुगतान से उन्हें लगा कि काम वास्तविक है और इसके जरिए कमाई की जा सकती है।
शुरुआत में 2,000 रुपये निकालने की भी मिली अनुमति
रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र को शुरुआती चरण में 2,000 रुपये निकालने की अनुमति दी गई थी। इससे योजना पर उनका भरोसा और बढ़ गया।
इसके बाद उन्हें ज्यादा कमाई वाले टास्क पूरे करने के लिए अपने पैसे जमा करने को कहा गया। कुछ असाइनमेंट के लिए QR कोड और बैंक ट्रांसफर के जरिए भुगतान करने की बात कही गई। कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि आगे के टास्क पूरे करने के लिए पहले निर्धारित रकम जमा करनी होगी।
जब छात्र ने अपनी जमा राशि और कमाई निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने कथित तौर पर टास्क में गलती होने की बात कही। इसके बाद खाते को अनलॉक करने और रकम जारी करने के लिए अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई।
टैक्स और बीमा के नाम पर मांगे गए पैसे
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने खाते से जुड़ी प्रक्रिया, टैक्स, बीमा और निकासी शुल्क के नाम पर छात्र से और पैसे मांगे। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि सभी भुगतान पूरे होने के बाद उनकी जमा रकम वापस कर दी जाएगी।
9 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच छात्र ने अपने भारतीय स्टेट बैंक और द यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के खातों से कई लेनदेन किए। शिकायत में इन सभी भुगतानों की कुल राशि 9.66 लाख रुपये बताई गई है।
21 अक्टूबर को छात्र को कथित तौर पर ग्राहक सहायता के नाम से एक ईमेल मिला। इसमें पहले जमा की गई रकम वापस दिलाने के लिए 52,000 रुपये और देने को कहा गया। बार-बार पैसे मांगे जाने पर छात्र को संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।
साइबर हेल्पलाइन 1930 पर की शिकायत
ठगी का संदेह होने के बाद छात्र ने साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया। उन्होंने कथित तौर पर ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, लिंक भेजने वालों, Telegram ग्रुप के संचालकों और रकम प्राप्त करने वाले बैंक खातों से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट के अनुसार, छात्र ने WhatsApp बातचीत के स्क्रीनशॉट, प्रोफाइल की जानकारी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी उपलब्ध कराए हैं। पुलिस लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि रकम के आगे के प्रवाह का पता लगाया जा सके और कथित रूप से शामिल लोगों की पहचान की जा सके।
ऑनलाइन टास्क के नाम पर होने वाली ठगी से कैसे बचें?
इस घटना से ऑनलाइन पार्ट-टाइम कमाई के प्रस्तावों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत सामने आती है। साइबर ठग कई बार पहले छोटी रकम का भुगतान करके भरोसा जीतते हैं और बाद में अधिक कमाई या पहले से जमा पैसे वापस दिलाने के नाम पर बड़ी रकम मांगते हैं।
अगर किसी अनजान व्यक्ति या ग्रुप की ओर से ऑनलाइन काम शुरू करने के लिए पहले पैसे जमा करने को कहा जाए, तो सावधान रहें। खाते को अनलॉक करने, टैक्स देने, बीमा कराने या कमाई निकालने के लिए बार-बार अतिरिक्त भुगतान की मांग भी धोखाधड़ी का संकेत हो सकती है।
किसी अनजान लिंक पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और OTP किसी के साथ साझा न करें। यदि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाए, तो तुरंत 1930 पर संपर्क करें और आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
अहमदाबाद का यह मामला बताता है कि ऑनलाइन टास्क से कमाई के नाम पर लोगों को किस तरह आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है। शुरुआत में छोटा भुगतान मिलने का मतलब यह नहीं है कि कोई योजना भरोसेमंद है। किसी भी ऑनलाइन काम के लिए अपनी रकम जमा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।
फिलहाल, छात्र की शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपियों और रकम के लेनदेन से जुड़ी पूरी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।
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